Mata Gujri Ji [Mata Gujar kaur Ji] (1624-1705) – त्याग, आस्था और मातृत्व की अमर मिसाल

Mata Gujari Ji [Mata Gujar kaur Ji] (1624-1705) का परिचय

Mata Gujar kaur Ji सिख धर्म की सबसे पूजनीय और आदरणीय माताओं में से एक हैं। वे Guru Tegh Bahadur Ji की धर्मपत्नी और Guru Gobind Singh Ji की माता थीं।
सिख इतिहास में Mata gujri ji को असीम धैर्य, अडिग आस्था और सर्वोच्च बलिदान के लिए जाना जाता है।

वे केवल एक गुरु माता नहीं थीं, बल्कि उन्होंने सिख पंथ को ऐसे संस्कार दिए जिन्होंने आने वाली पीढ़ियों को अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति दी।

जन्म और प्रारंभिक जीवन

Mata Gujri ji (Mata Gujar Kaur Ji) का जन्म लगभग 1624 ईस्वी में हुआ माना जाता है। उनका बचपन धार्मिक, नैतिक और आध्यात्मिक वातावरण में बीता।
बचपन से ही उनमें:

  • सत्य बोलने की आदत
  • सेवा भावना
  • ईश्वर में गहरी श्रद्धा

स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी।

यही कारण था कि आगे चलकर वे सिख इतिहास की एक मजबूत स्तंभ बनीं।

Mata Gujar kaur Ji का Guru Tegh Bahadur Ji से विवाह

Mata gujri ji

Mata Gujri Ji का विवाह Guru Tegh Bahadur Ji से हुआ। विवाह के बाद उनका जीवन पूरी तरह से सेवा, त्याग और धर्म रक्षा को समर्पित हो गया।

उन्होंने गुरु जी के साथ:

  • कठिन यात्राएँ कीं
  • वनवास जैसा जीवन जिया
  • मुगल अत्याचारों का सामना किया

फिर भी कभी शिकायत नहीं की।

माता के रूप में Mata Gujri Ji [Mata Gujar kaur Ji]

माता गुजरी जी एक आदर्श माता थीं। उन्होंने अपने पुत्र Guru Gobind Singh Ji को केवल शस्त्र विद्या ही नहीं, बल्कि:

  • धर्म के लिए जीना
  • अन्याय के विरुद्ध खड़ा होना
  • सभी धर्मों का सम्मान करना

जैसे महान गुण सिखाए।

Guru Gobind Singh Ji के व्यक्तित्व में जो साहस और करुणा दिखाई देती है, उसके पीछे Mata Gujri Ji के संस्कारों की बड़ी भूमिका रही।

Guru Tegh Bahadur Ji की शहादत और Mata Gujri Ji

जब Guru Tegh Bahadur Ji ने कश्मीरी पंडितों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दिल्ली में शहादत दी, तब Mata Gujar kaur Ji पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

लेकिन उन्होंने:

यह घटना माता गुजरी जी के चरित्र की महानता को दर्शाती है।

Sirhind की ओर यात्रा – इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय

Guru Gobind Singh Ji के परिवार को अलग-अलग कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। माता गुजरी जी अपने दो छोटे पोतों—

के साथ Sirhind पहुँचीं।

वहाँ उन्हें Thanda Burj (ठंडा बुर्ज) में कैद कर दिया गया।

Thanda Burj में Mata Gujri Ji का साहस

Thanda Burj एक खुला बुर्ज था, जहाँ:

  • कड़ाके की ठंड
  • भोजन और वस्त्रों की कमी
  • मानसिक यातनाएँ

सब सहनी पड़ीं।

इस कठिन समय में Mata Gujar kaur Ji ने अपने पोतों को समझाया:

“धर्म से बड़ा कुछ नहीं होता। सच्चाई के लिए जान देना भी छोटा बलिदान है।”

साहिबज़ादों की और Mata Gujri Ji की शहादत

जब साहिबज़ादों पर इस्लाम स्वीकार करने का दबाव डाला गया, उन्होंने स्पष्ट इनकार कर दिया।
अंततः दोनों साहिबज़ादों को दीवार में जिंदा चिनवा दिया गया

यह समाचार सुनते ही माता गुजरी जी ने उसी Thanda Burj में अपनी देह त्याग दी
यह सिख इतिहास में मातृत्व की सबसे महान शहादत मानी जाती है।

ऐतिहासिक संदर्भ – महत्वपूर्ण स्थान

स्थानMata Gujri Ji [Mata Gujar kaur Ji] से संबंध
Sirhindअंतिम समय और शहादत
Fatehgarh Sahibसाहिबज़ादों की शहादत भूमि
Anandpur SahibGuru Gobind Singh Ji का निवास
DelhiGuru Tegh Bahadur Ji की शहादत

निष्कर्ष (Conclusion)

माता गुजरी जी सिख इतिहास की केवल एक महान महिला नहीं, बल्कि आस्था, त्याग और मातृत्व की जीवंत मूर्ति हैं।
उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्चे धर्म के लिए दिया गया बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाता।

Mata Gujri Ji – FAQs

Mata Gujri Ji कौन थीं?

माता गुजरी जी सिख धर्म की एक महान माता थीं। वे Guru Tegh Bahadur Ji की धर्मपत्नी और Guru Gobind Singh Ji की माता थीं।

Mata Gujar kaur Ji का जन्म कब हुआ था?

माता गुजरी जी का जन्म लगभग 1624 ईस्वी में हुआ माना जाता है।

Mata Gujri Ji को सिख इतिहास में क्यों याद किया जाता है?

उन्हें उनके धैर्य, अडिग आस्था, त्याग और सर्वोच्च मातृत्व बलिदान के लिए याद किया जाता है।

When did Mata Gujri Ji attain Shaheedi?

Mata Gujri Ji attained Shaheedi on 26-27 December 1705.
After witnessing the martyrdom of her grandsons, Sahibzada Zorawar Singh Ji and Sahibzada Fateh Singh Ji, she left her physical body due to extreme grief, shock, and harsh imprisonment conditions

In 2025 when is sahibzade and mata gujar kaur shaheedi divas?

26 December 2025 (Friday)

Is Mata Gujri Ji’s Shaheedi connected to Saka Sirhind?

Yes.
Mata Gujri Ji’s Shaheedi is directly connected to Saka Sirhind (December 1705). She was imprisoned with the younger Sahibzadas, and her martyrdom occurred immediately after their execution.

Mata Gujri Ji is the grandmother of whom?

Mata gujar Kaur Ji is grandmother of chaar sahibzaade:
1.Baba Ajeet singh ji
2. Baba Jujhar singh ji
3. Baba Zoravar Singh Ji
4. Baba Fateh Singh ji

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